बरेली पुलिस का बड़ा धमाका: 'डॉक्टर' के ट्रस्ट के जरिए होता था करोड़ों का फ्रॉड; चीन तक जुड़े हैं तार
Bareilly Police Uncovers Major Scam
बरेली। Bareilly Police Uncovers Major Scam, कैंट पुलिस ने जिस साइबर ठग गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया। वह बरेली में बैठकर एक और बड़ी ठगी करने वाले थे। इस ठगी को अंजाम देने के लिए गिरोह का सरगना सुमित लखनऊ से शनिवार शाम को ही बरेली आ रहा था। उसके रुकने के लिए होटल में कमरा बुक हो चुका था सभी तैयारियां पूरी थीं।
बस किसी व्यक्ति को अपने जाल में फंसाना बाकी था। ठगी की जो भी रकम होती उसे वह डॉक्टर सचेंद्र के खाते में भेजते और उसके खाते से 22 बेनिफिसरी खातों में ट्रांसफर कर दी जाती जो साउथ से आपरेट किए जाते हैं। इससे पहले ही पुलिस ने गिरोह को पकड़ लिया।
यह है पूरा मामला
कैंट पुलिस ने शनिवार को फरीदपुर के बक्सरिया मुहल्ला निवासी शाकिब अली, भमौरा के बलिया निवासी राजकुमार, करगैना के जागृति नगर निवासी आशीष, अंबेडकर नगर के सिधोली निवासी डॉक्टर सचेंद्र और बाराबंकी निवासी बब्लू उर्फ माधोराम को गिरफ्तार किया था।
आरोपितों के पास से पुलिस ने लैपटाप, सात मोबाइल, चेकबुक, ट्रस्ट की मुहर, तमंचा आदि काफी सामान बरामद किया। पुलिस ने पूछताछ के बाद आरोपितों को जेल भेज दिया। अभी तक की जांच में सामने आया कि आरोपित साइबर ठगी की घटना को अंजाम देते थे।
यह ठग किसी एक बड़े खाते में ठगी का रुपया मंगाकर अलग-अलग खातों में भेजते और चाइना आदि देशों में बैठे इनके आकाओं के पास सभी रुपया क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से भेजा जाता था।
पुलिस को आरोपितों के पास से डॉक्टर के नाम एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट का खाता मिला। उसकी जांच की गई तो उससे लिंक 22 अन्य खाते सामने आए। यह सभी खाते करेला, कर्नाटक आदि से संचालित हो रहे थे।
ट्रस्ट के खाते में ठगी का जो भी रुपया आता उसे तत्काल प्रभाव से इन्ही 22 खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता। जिससे यदि डॉक्टर के ट्रस्ट के खाते को फ्रीज भी किया जाए तो उनका रुपया तब तक ट्रांसफर हो चुका हो।
इन सभी 22 खातों के विरुद्ध एनसीपीसीआर पोर्टल पर 554 शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस ने अब इन सभी खातों की जानकारी के लिए गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है।
पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह गिरोह यहां पर इसलिए एकत्र हुआ था क्योंकि यह बरेली में बैठकर एक नई ठगी की घटना को अंजाम देने वाले थे।
मूल रूप से नवाबगंज निवासी (वर्तमान में लखनऊ निवासी) सुमित जो लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करता था वह बरेली आ चुका था। इसके लिए गिरोह के सदस्यों ने होटल में रुकने की पूरी व्यवस्था की थी।
शनिवार की रात यह किसी न किसी व्यक्ति को ठगी का शिकार बनाता और डॉक्टर के ट्रस्ट के खाते में रुपये मंगाकर 22 बेनिफिसिरी खातों में ट्रांसफर कर फरार हो जाता। पुलिस अब डॉक्टर के ट्रस्ट के खाते की भी जानकारी जुटा रही है।
चाइना व अन्य देशों को क्रिप्टो करेंसी में भेजा जाता था रुपया
पुलिस ने जब गिरोह के सदस्यों से पूछताछ की और पूछा कि उनका क्या प्राफिट होता है तो गिरोह के सदस्यों ने बताया कि उन्हें जो भी प्राफिट मिलता है वह क्रिप्टो करेंसी में मिलता है।
इसके बाद पुलिस ने और पूछताछ की सामने आया कि ठगी का जो रुपया इन 22 खातों में जाता है। उनसे कैश निकालकर उन्हें क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से ही देश से बाहर विदेशों में भेजा जाता है।
पुलिस का कहना हैं कि इन 22 खातों की जानकारी के बाद अभी और भी चीजें स्पष्ट होंगी। बाकी गिरोह के मुख्य सरगना सुमित और उसके भांजे निर्मल की तलाश में दो टीम लगी हैं। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।